क्या आपका मोबाइल फोन वास्तव में आपको हानि पहुंचा सकता है? अभी तक इसका कोई प्रमाण नहीं है कि मोबाइल फोन का उपयोग आपको कैंसर से ग्रसित कर सकता। आइये जानते है इस मामले में भौतिकी क्या कहती है?
मोबाइल फोन 800 से 2600 मेगाहर्टज् आवृत्तियों के बीच की रेडियो और माइक्रोवेव विकिरणों का उत्सर्जन व ग्रहण करते हैं। (यह आपके देश और मोबाइल ऑपरेटर के आधार पर भिन्न भिन्न हो सकता है)
मोबाइल फोन 800 से 2600 मेगाहर्टज् आवृत्तियों के बीच की रेडियो और माइक्रोवेव विकिरणों का उत्सर्जन व ग्रहण करते हैं। (यह आपके देश और मोबाइल ऑपरेटर के आधार पर भिन्न भिन्न हो सकता है)
सेलफोन द्वारा उत्सर्जित विकिरण नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन के वर्ग में आती है। नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन के वर्ग में आने वाली विकिरणों में इतनी ऊर्जा नहीं होती है कि वे हमारी कोशिकाओं के लिए हानिकारक हों। दृश्य प्रकाश, अवरक्त किरणें (जो आपके टीवी के रिमोट में उपयोग होती हैं), माइक्रोवेव (जो आपके ओवन तथा मोबाइल फोन में उपयोग की जाती हैं) तथा रेडियो किरणें (जो रेडियो संचार, रडार आदि में उपयोग की जाती हैं), सभी नॉन आयोनाइजिंग रेडिएशन या अन-आयनिक विकिरणे हैं।
आयनिक विकिरणें या आयोनाइजिंग रेडियेशन वे किरणें होती हैं जिनमें इतनी अधिक ऊर्जा होती है जो किसी परमाणु से टकराने पर इलेक्ट्रॉन को निकाल देती है या दूसरे शब्दों में आयनीकृत कर देती है। इस प्रकार की विकिरण से अधिक प्रभावित होने पर यह हमारी कोशिकाओं तथा डीएनए को विकृत कर देती है एवं प्रायः शरीर को जला सकती है, घायल कर सकती है व हमें बीमार कर सकती है और यहां तक कि कैंसर तक पैदा कर सकती है वहीं नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन अधिकतम गर्मी पैदा कर सकती है जिसका उपयोग हम माइक्रोवेव में करते हैं। माइक्रोवेव में हम 600 से 100 वाट ऊर्जा का उपयोग करते हैं वहीं आपका मोबाइल फोन 2 वाट से भी कम ऊर्जा का उपयोग करता है।
वैज्ञानिकों अभी तक ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं मिली है जिससे कि मोबाइल फोन के उपयोग से कैंसर उत्पन्न होता हो या आपको अन्य किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या होती हो। पिछले 15 सालों से मोबाइल फोन बहुतायत मात्रा में (भारत में लगभग 10 साल से) इस्तेमाल किये जा रहे हैं पर अभी तक इसका कोई प्रमाण नहीं है कि मोबाइल फोन हमें नुकसान पहुंचा सकता है।
हां यह बात अलग है कि कई मामलों में लोगों को मोबाइल पर झुककर टाइप करने या ज्यादा देर तक चैट करने से पीठ में दर्द की शिकायत पायी गई है लेकिन अभी तक मोबाइल फोन के विकिरण का मानव स्वास्थ्य पर कोई भी असर नहीं पाया गया है।
क्या आप जानते हैं?
हम सभी किसी न किसी रूप में थोडीं मात्रा में आयनिक विकिरण के सम्पर्क में आते हैं, जैसे सूर्य से आने वाली कॉस्मिक किरणें, हमारी धरती द्वारा उत्सर्जित विकिरण और यहां तक कि सभी जीव-जन्तु और पौधे थोडीं मात्रा में आयनिक विकिरण का उत्सर्जन करते हैं लेकिन हमारा शरीर इस नगण्य मात्रा में आयनिक विकिरण से प्रभावित नहीं होता।
तो हमारा कहना यही है कि इस बात से निश्चिंत हो जाइये कि आपका सेलफोन आपको कैंसर का रोगी बना देगा, सेलफोन इस्तेमाल कीजिए लेकिन कुछ सावधानियों के साथ जैसे ज्यादा देर झुककर चैटिंग न करें, ये आपको अनचाहा पीठ दर्द दे सकता है तथा ज्यादा लम्बी बात करने के लिए इयरफोन का इस्तेमाल करें या फोन को कान से एक इंच दूर रखे ताकि आपका सिर मोबाइल फोन की गर्मी से गरम न हो।
अभी के लिए इतना ही, अगली पोस्ट जल्दी ही..
नोट : यह आर्टिकिल किञ्जल्क तिवारी द्वारा ज्ञानवाणी के लिए लिखा गया है तथा सर्वाधिकार लेखकाधीन है। इसके पुनः प्रकाशन के लिए लेखक की पूर्व-अनुमति आवश्यक है।

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