जानिए कैसे थे वो 50 दिन जब धर्म के नाम हुए इस विभाजन में दंगे-फसाद और मारकाट से महज 50 से 60 दिनों के भीतर मारे गये थे 20 लाख लोग, 10 हजार से ज्यादा महिलाओं का अपहरण किया गया, उनके साथ बलात्कार हुआ, जबकि लाखों बच्चे अनाथ हो गए, कितने परिवार टूटे.. कितनी मांओं ने अपनी बेटियों
आपको जानकार आश्चर्य होगा कि मनुष्य जाति के इतिहास में इतनी ज्यादा संख्या में लोगों का विस्थापन कभी नहीं हुआ। यह संख्या तकरीबन 1.45 करोड़ थी। 1951 की विस्थापित जनगणना के अनुसार विभाजन के एकदम बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गये और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए।
धर्म के नाम हुए इस विभाजन में दंगे-फसाद और मारकाट के बीच मानवता जितनी शोषित, पीड़ित, और छटपटाई है उतनी किसी घटना में नहीं हुई। 10 हजार से ज्यादा महिलाओं का अपहरण किया गया, उनके साथ बलात्कार हुआ, जबकि सैंकड़ों बच्चे अनाथ हो गए, और 20 लाख से अधिक लोग विस्थापन के समय दंगों मे मारे गए।
एक अनुमान के मुताबिक विभाजन की इस रूह कंपा देने वाली और मानवजाति के इतिहास को शर्मिंदा कर देने वाली इस त्रासदी में तकरीबन 20 लाख से ज्यादा लोग मारे गए। इसके बाद आजाद हिंदुस्तान और आजाद भारत दोनों में ही विस्थापन के बाद अपना सबकुछ छोड आए लोगों को अपने जीवन को पटरी पर लाने के लिए, घरबार काम धंधा दोबारा जमाने के लिए शरणार्थी बनकर जिस अमानवीय त्रासदी से गुजरना पड़ा वह तो एशिया के इतिहास का काला अध्याय है।
दरअसल, भारत और पाकिस्तान का बंटवारा महज 50 से 60 दिनों के भीतर लाखों लोगों का विस्थापन था, जो विश्व में कहीं नहीं हुआ। 10 किलोमीटर लंबी लाइन में लाखों लोग देशों की सीमा को पार हुए। महज कुछ ही समय में एक स्थान पर सालों से रहने वाले को अपना घर बार, जमीन, दुकानें, जायदाद, संपत्ति, खेती किसानी छोडकर हिंदुस्तान से पाकिस्तान और पाकिस्तान से हिंदुस्तान गए।
आपको जानकार आश्चर्य होगा कि मनुष्य जाति के इतिहास में इतनी ज्यादा संख्या में लोगों का विस्थापन कभी नहीं हुआ। यह संख्या तकरीबन 1.45 करोड़ थी। 1951 की विस्थापित जनगणना के अनुसार विभाजन के एकदम बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गये और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए।
धर्म के नाम हुए इस विभाजन में दंगे-फसाद और मारकाट के बीच मानवता जितनी शोषित, पीड़ित, और छटपटाई है उतनी किसी घटना में नहीं हुई। 10 हजार से ज्यादा महिलाओं का अपहरण किया गया, उनके साथ बलात्कार हुआ, जबकि सैंकड़ों बच्चे अनाथ हो गए, और 20 लाख से अधिक लोग विस्थापन के समय दंगों मे मारे गए।
एक अनुमान के मुताबिक विभाजन की इस रूह कंपा देने वाली और मानवजाति के इतिहास को शर्मिंदा कर देने वाली इस त्रासदी में तकरीबन 20 लाख से ज्यादा लोग मारे गए। इसके बाद आजाद हिंदुस्तान और आजाद भारत दोनों में ही विस्थापन के बाद अपना सबकुछ छोड आए लोगों को अपने जीवन को पटरी पर लाने के लिए, घरबार काम धंधा दोबारा जमाने के लिए शरणार्थी बनकर जिस अमानवीय त्रासदी से गुजरना पड़ा वह तो एशिया के इतिहास का काला अध्याय है।



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